हम  कैसे  मनाये  नया  साल  ? (कविता)

हम कैसे मनाये नया साल ? (कविता)

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हम  क्यों  और कैसे  मनाये  नया साल ?, जबकी देश में है हमारी बेटियों का बुरा हाल . कहने को तो नारा दिया ''बेटी बचाओ ,बेटी पढाओ '', मगर बचेंगी तभी तो पढ़ेंगी यह  नौनिहाल . कदम-कदम पर जो  वेह्शी -दरिंदों का राज है, कैसे करोगे इनके जीवन को सुरक्षित और बहाल ? जब तक बेखौफ ,बेफिक्र ,स्वछन्द नहीं होंगी  नन्ही चिड़िया , कैसे उड़ सकेगी पंख फैलाकर ,भले ही देदो गगन विशाल ? व्याघ्रों से ही नहीं इन्हें  घर के दुश्मनों से भी बचाना होगा , कोख में ही कभी मार दी जाती है समझ के जी का जंजाल . तो जनाब ! पहले दो बेटियों को सुरक्षित /स्वतंत्र स्थान समाज में, तत्पश्चात सार्थक होगा हर्षौल्लास से मनाना  नया साल .        
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