हम  कैसे  मनाये  नया  साल  ? (कविता)

हम कैसे मनाये नया साल ? (कविता)

अस्मितावादी विमर्श, आधी-आबादी, कला जगत, कविता, शिक्षा, संस्कृति, सोशल मीडिया, हिंदी टेक
हम  क्यों  और कैसे  मनाये  नया साल ?, जबकी देश में है हमारी बेटियों का बुरा हाल . कहने को तो नारा दिया ''बेटी बचाओ ,बेटी पढाओ '', मगर बचेंगी तभी तो पढ़ेंगी यह  नौनिहाल . कदम-कदम पर जो  वेह्शी -दरिंदों का राज है, कैसे करोगे इनके जीवन को सुरक्षित और बहाल ? जब तक बेखौफ ,बेफिक्र ,स्वछन्द नहीं होंगी  नन्ही चिड़िया , कैसे उड़ सकेगी पंख फैलाकर ,भले ही देदो गगन विशाल ? व्याघ्रों से ही नहीं इन्हें  घर के दुश्मनों से भी बचाना होगा , कोख में ही कभी मार दी जाती है समझ के जी का जंजाल . तो जनाब ! पहले दो बेटियों को सुरक्षित /स्वतंत्र स्थान समाज में, तत्पश्चात सार्थक होगा हर्षौल्लास से मनाना  नया साल .        
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नीरज की याद में … ( ग़ज़ल )

नीरज की याद में … ( ग़ज़ल )

कला जगत, कविता, ग़ज़ल, शिक्षा, संस्कृति
ये चश्मे चिराग बुझे ,महफ़िल में अँधेरा हो गया, जिंदगी का तार टूट गया और तराना सो गया . अब कहाँ जाए तेरे उम्दा गीतों को चाहने वाले , गीतों का दरवेश /राजकुमार जो खामोश हो गया . जो होता था कभी महफ़िल की जान औ रौनक , वोह अब महफ़िल को सुनी कर छोड़ गया . इंसानी ज़ज्बातों को जिसकी कलम ने यूँ छुआ , के हर इंसान के दिल की आवाज़ वोह बन गया . हिंदी और उर्दू का अनूठा संगम करवाता नीरज, खुद  इश्क-ऐ- हक़ीकी से  एकाकार  हो गया. रहेगी जब तक यह दुनिया ,तेरा नाम अमर रहेगा , तेरे नगमो का रंग इस कदर हमारे जीवन में घुल गया.      
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