नीरज की याद में … ( ग़ज़ल )

नीरज की याद में … ( ग़ज़ल )

कला जगत, कविता, ग़ज़ल, शिक्षा, संस्कृति
ये चश्मे चिराग बुझे ,महफ़िल में अँधेरा हो गया, जिंदगी का तार टूट गया और तराना सो गया . अब कहाँ जाए तेरे उम्दा गीतों को चाहने वाले , गीतों का दरवेश /राजकुमार जो खामोश हो गया . जो होता था कभी महफ़िल की जान औ रौनक , वोह अब महफ़िल को सुनी कर छोड़ गया . इंसानी ज़ज्बातों को जिसकी कलम ने यूँ छुआ , के हर इंसान के दिल की आवाज़ वोह बन गया . हिंदी और उर्दू का अनूठा संगम करवाता नीरज, खुद  इश्क-ऐ- हक़ीकी से  एकाकार  हो गया. रहेगी जब तक यह दुनिया ,तेरा नाम अमर रहेगा , तेरे नगमो का रंग इस कदर हमारे जीवन में घुल गया.      
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