वर्जिन

आधी-आबादी, कविता
मैं वर्जिन हूँ विवाह के इतने वर्षों के पश्चात् भी मैं वर्जिन हूँ संतानों की उत्पत्ति के बाद भी। वो जो तथाकथित प्रेम था वो तो मिलन था भौतिक गुणों का और यह जो विवाह है यह मिलन था दो शरीरों का मैं आज भी वर्जिन हूँ अनछुई स्पर्शरहित। मैं मात्र भौतिक गुण नहीं मैं मात्र शरीर भी नहीं मैं वो हूँ जो पिता के आदर्शों के वस्त्र में छिपी रही मैं वो हूँ जो माँ के ख्वाबों के पंख लगाये उड़ती रही मैं वो हूँ जो पति की जरूरतों में उलझी रही मैं वो भी हूँ जो बच्चों की खुशियों के पीछे दौड़ती रही। मैं अब वर्जिन नहीं रहना चाहती मैं छूना चाहती हूँ खुद को।
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उदय प्रकाश की कथा सृष्टि का स्त्री पक्ष: -विनय कुमार मिश्र

उदय प्रकाश की कथा सृष्टि का स्त्री पक्ष: -विनय कुमार मिश्र

आधी-आबादी
उदय प्रकाश की कथा सृष्टि का स्त्री पक्ष -विनय कुमार मिश्र  सभ्यता के विकास के साथ स्त्रियाँ शिक्षा में आगे बढ़ रहीं हैं. छोटी से बड़ी नौकरियों में, व्यवसाय में तथा जीवन के विविध क्षेत्रों में इनकी मौजूदगी दिख रहीं है. बावजूद इसके पुरुष प्रभुत्ववादी समाज में स्त्रियों को समानता का हक ,पक्ष और सम्मान नहीं मिला हैं. स्त्रियों का जीवन निरंतर जटिल चक्रव्यूह में उलझता दिख रहा है. 73वें-74वें संविधान संशोधन के तहत पंचायत तथा नगर निकायों के चुनाव में स्त्रियों के लिए एक तिहाई आरक्षण का प्रावधान किया गया है, लेकिन सबसे बड़ी विडम्बना कि स्त्रियों के लिए एक तिहाई आरक्षण का विधेयक भारतीय संसद में अभी तक लटका है. तथाकथित आधुनिक और उत्तर आधुनिक दौर में, सदियों से शोषित स्त्रियों के शोषण के तौर तरीकों में काफी…
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पाठ्यक्रमों के द्वारा जेण्डर संवेदनशीलता: चित्रलेखा अंशु

पाठ्यक्रमों के द्वारा जेण्डर संवेदनशीलता: चित्रलेखा अंशु

आधी-आबादी
समाज में बच्चों को कई तरह के व्यावहारिक पाठशालाओं से होकर गुजरना पड़ता है । प्राथमिक रूप से परिवार में बच्चों को नैतिक और चारित्रिक शिक्षा दी जाती है वहीं स्कूल के स्तर से बच्चों के व्यावहारिक ज्ञान का विकास पुस्तकों के माध्यमों से होता है । यही वह आधारभूत समय होता है जब एक बच्चे की चेतना विभिन्न माध्यमों से गहराई से विकसित की जाती है । यही वह प्राथमिक समय भी होता है जब एक बच्चे को पाठ्यक्रमों के द्वारा सैद्धांतिक बातें भी सिखाई जाती है जिसका प्रभाव ताउम्र उनके मानो-मस्तिष्क पर पड़ता है । हमारे समाज में एक मुहावरा बहुत प्रचलित है, ‘जैसा बोओगे वैसा काटोगे’ अर्थात हम बच्चों के प्रारम्भिक जीवन में उन्हें जैसी शिक्षा देंगे उसका प्रभाव अंतिम समय तक वैसा ही बना रहेगा ।…
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