सौ बरस सौ कविताएं चीन की कविताओं में आधुनिकवाद: संपादन रति सक्सेना

सौ बरस सौ कविताएं चीन की कविताओं में आधुनिकवाद: संपादन रति सक्सेना

पुस्तक कोना
चीनी साहित्य में सबसे पहले नई कविता के बारे में चर्चा 1916 में हु शि ने की,उन्होंने खुल कर नई कविता यानी कि छन्द विहीन कविता के बारे में अपने तर्कों को इस तरह रखा कि कविता में छन्द से, छन्द विहीन होने के कारण और आवश्यकता स्पष्ट होती दिखाई देती है। वे कविता में तर्क को स्थान देते हुए अनजाने में नई कविता की भावभूमि रखते हुए अतीत को मृत कहने का साहस भी रख रखते हैं। --“शब्द नये पुराने तो नहीं होते, लेकिन मृत या जीवित तो होते हैं।   यहीं से हम चीनी साहित्य में नई कविता की नींव देखते हैं, जो लगातार नये- नये प्रयोगों के साथ विश्व में अपनी पहचान बनाती रही है। चीनी कविता की विशेषता यह भी है कि अधिकतर कवियों ने अपने…
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लेखक/संपादक मित्रों के लिए सुनहरा अवसर [निशुल्क पुस्तक प्रकाशन वो भी 70% रायल्टी के साथ]

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पुस्तक कोना
लेखक/संपादक मित्रों के लिए सुनहरा अवसर ईबुक प्रकाशन ISBN नंबर के साथ (बिना किसी लागत के) अगर कोई लेखक/संपादक बिना किसी लागत के ईबुक प्रकाशित करवाना चाहते हैं, तो अपनी पाण्डुलिपि वर्ड फाइल में sonylalit@gmail.com पर भेजें। ईबुक हिंदी, इंग्लिश, भोजपुरी, मैथिली इत्यादि रोमन या देवनागरी लिपि में लिखी जाने वाली किसी भी भाषा में प्रकाशित करवाई जा सकती है। ईबुक गूगल बुक, गूगल प्ले स्टोर, अमेज़न और अंतर्राष्ट्रीय पुस्तकालयों में प्रकाशित की जाएगी। पाण्डुलिपि भेजने से पूर्व निम्नलिखित महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर ध्यान दें: महत्वपूर्ण एवं ध्यान देने योग्य बिंदु: 1. पाण्डुलिपि वर्ड फाइल में भेजें 2. फॉण्ट यूनिकोड/मंगल होना चाहिए 3. पाण्डुलिपि के साथ फोटो और संक्षिप्त परिचय भी अवश्य भेजें 4. भेजने से पूर्व अशुद्धि अवश्य जाँच लें 5. ईमेल में इसकी उद्घोषणा करें कि उनकी रचना मौलिक…
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अपनी पुस्तक का प्रकाशन स्वयं करें [ई-पुस्तक का प्रकाशन एवं बिक्री]

अपनी पुस्तक का प्रकाशन स्वयं करें [ई-पुस्तक का प्रकाशन एवं बिक्री]

पुस्तक कोना
वर्तमान समय में इंटरनेट माध्यम से आप अपनी पुस्तक स्वयं प्रकाशित कर सकते हैं साथ ही प्रचार-प्रसार कर सकते हैं। यहाँ हम आपको कुछ वेबसाइट के लिंक दे रहे हैं, जहां आप ई पुस्तक प्रकाशित कर सकते हैं और उसे अमेज़न इत्यादि के माध्यम से बेच भी सकते हैं- [लाल रंग के सभी लिंक पर क्लिक करें] Smashwords  [ यहाँ आप आप वर्ड फाइल में अपनी पाण्डुलिपि को अपलोड कीजिये, वह ई-पुस्तक रूप में परिवर्तित होगी। इसके अतिरिक्त यह वेबसाईट पुस्तक के प्रचार-प्रसार हेतु भी कार्य करती है] myebookmaker [ यहाँ आप आप वर्ड फाइल में अपनी पाण्डुलिपि को अपलोड कीजिये, वह ई-पब रूप में परिवर्तित होगी उसके पश्चात आप उसे डाउनलोड कर सकते हैं और प्रचार-प्रसार कर सकते है] Creating E book [यहाँ अत्यंत ही सरल रूप में आप…
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खाँटी किकटिया / एक उपन्यास अलग-सा: ध्रुव गुप्त 

खाँटी किकटिया / एक उपन्यास अलग-सा: ध्रुव गुप्त 

पुस्तक कोना
अश्विनी कुमार पंकज हिंदी के प्रख्यात लेखक, उपन्यासकार, नाटककार और विचारक होने के अलावा देश की आदिवासी भाषाओं के संरक्षक और आदिवासी संस्कृतियों के प्रखर योद्धा के तौर पर भी जाने जाते हैं। दशकों से झारखण्ड के आदिवासियों की सांस्कृतिक अस्मिता और अधिकारों के लिए संघर्षरत पंकज जी का एक और चेहरा तब सामने आया जब परसो पटना में अपनी मातृभाषा मगही में लिखे उनके उपन्यास 'खाँटी किकटिया' (प्रकाशक प्यारा केरकेट्टा फाउंडेशन, चेशायर होम रोड, बरियातू, रांची 834009, मूल्य 250 रु) का लोकार्पण हुआ। बुद्ध और महावीर के समकालीन आजीवक मक्खलि गोसाल के जीवन और दर्शन पर आधारित यह उपन्यास मगही भाषा के लिए एक उपलब्धि की तरह है। मक्खलि गोसाल को उनके समय का महान विचारक, कवि और सामाजिक विसंगतियों के खिलाफ एक योद्धा के तौर पर जाना जाता है।…
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राजनीति की किताब [सम्पादक अभय दुबे]: समीक्षक- रत्नेश कुमार यादव [पुस्तक समीक्षा]

राजनीति की किताब [सम्पादक अभय दुबे]: समीक्षक- रत्नेश कुमार यादव [पुस्तक समीक्षा]

पुस्तक कोना
पुस्तक का चयन:- प्रस्तुत पुस्तक राजनीति की किताब के सम्पादक अभय दुबे ने रजनी कोठारी का कृतित्व के आधार पर प्रकाशित किया है। जिसमें भारतीय समाज के संदर्भ में राजनीतिकरण के रूपरेखा को प्रदर्शित किया है। पुस्तक राजनीति की किताब के अनुक्रम में लोक चिंतन ग्रंथमाला को यह पहली कड़ी हिंदी के पाठकों का परिचय राजनीतिशास्त्र के मशहुर विद्वान रजनी कोठरी के कृतित्व से कराती है। पुस्तक के अनुक्रम के अगले अध्याय में भारतीय राजनीति के असलियत के बारे में बतलाया गया है जिसमें भारतीय राजनीतिक संस्कृतिक और भारतीय व्यक्ति की राजनीतिक शाख्सियत का विकास को प्रदर्शित किया गया है। वही पुस्तक में एक ही राजनीतिक दल का वर्चस्व कांग्रेस प्रणाली के बारे में बतलाया है। लेखक ने बतलाया कि 70वें दशक में कांग्रेस का तख्ता पलट हुआ और अन्य…
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पुस्तक -समीक्षा [निब के चीरे से: ओम नागर] समीक्षक: अरविन्द सोरल

पुस्तक -समीक्षा [निब के चीरे से: ओम नागर] समीक्षक: अरविन्द सोरल

पुस्तक कोना
तहखानों में भोर-सी बातें अरविन्द सोरल बातें कितनी होती है। कितने प्रकार की बातें। बातों के सहारे दुनिया चलती है। बातों के घोड़े पर चढ़ कर ही मनुष्य ने सभ्यता की इतनी सुदीर्घ यात्रा सम्पन्न की हैं। बहुत सारी बातें बड़ी काम की होती है। उनसे ही निर्माण होता हैं। सृजन होता हैं। शाहजहाँ और उसके इंजीनियरों के बीच क्या बाते होती होगी। ध्वंस भी होता है। सिकंदर और उसके सेनापतियों के बीच क्या बातें होती होगी। कुछ बातें होती है जो काल का रूपांतरण होती हैं। किंतु यह रूपांतरण बातों में करना प्रतिभा साध्य कार्य है। एक-एक दिन को डायरी के पृष्ठ भर बातों में बदला है ओम नागर ने। बातों के अनन्त में बातें ही उड़ती है। उनमें साहित्य की चिड़िया के पर पहचानना ही तो साहित्यिक प्रतिभा…
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भोजपुरी भाषा की तीन-तीन महत्वपूर्ण कृतियों का लोकार्पण- ध्रुव गुप्त

भोजपुरी भाषा की तीन-तीन महत्वपूर्ण कृतियों का लोकार्पण- ध्रुव गुप्त

पुस्तक कोना
एक शाम भोजपुरी के नाम ! पूर्वी चंपारण के ऐतिहासिक जिला मुख्यालय मोतिहारी के  टाउन हॉल में एक साथ भोजपुरी भाषा की तीन-तीन महत्वपूर्ण कृतियों का लोकार्पण हुआ। पहली कृति थी उर्दू और हिंदी के प्रख्यात शायर और रंगकर्मी गुलरेज़ शहजाद की किताब ' चंपारन सत्याग्रह गाथा'। प्रबंध काव्य शैली में रचित यह किताब दक्षिण अफ्रीका से लौटने के बाद चंपारन की भूमि में गांधी के महात्मा बनने की कहानी है। इस भोजपुरी प्रबंध काव्य में गुलरेज़ शहज़ाद ने गांधी के नेतृत्व में चम्पारण के सफल सत्याग्रह के बहाने चंपारण के इतिहास और संस्कृति तथा अंग्रेज साहबों द्वारा निलहे किसानों के शोषण और उनपर हुए अत्याचारों की जीवंत तस्वीर खींची है। चम्पारण सत्याग्रह की पृष्ठभूमि और निलहे किसानों की व्यथा पर ही लिखी गई दूसरी कृति थी लेखक दिवाकर राय…
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युगदृष्टा युगपुरुष आचार्य तुलसी

युगदृष्टा युगपुरुष आचार्य तुलसी

पुस्तक कोना
रत्नगर्भा भारत वसुंधरा पर अनेक रत्न पैदा हुए जिन्होंने अपनी आभा से केवल भारत को ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण विश्व को आलोकित किया । आचार्य तुलसी ऐसे ही अद्भुत प्रतिभाशाली पुरुष थे जिन्होंने एक सम्प्रदाय के आचार्य होते हुए भी कभी उसकी सीमाओ में अपने आप को आबध्द नहीं किया बल्कि सम्पूर्ण मानवता के विकास का पथ प्रशस्त किया । आचार्य तुलसी एक बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे जिन्होंने व्यक्ति की अंतर बाह्य शक्तियों को उजागर कर उनके विकास का पथ प्रशस्त किया तथा एक स्वस्थ समाज जीवन के योग्य घटक बनने की योग्यता क्षमता निर्माण की प्रक्रिया दी । प्रस्तुत ग्रन्थ "युगदृष्टा युगपुरुष आचार्य तुलसी" में आचार्य तुलसी का जीवन व्रत ,उनका चिंतन ,उनके द्वारा प्रारंभ किये गए विभिन्न आयामों का विश्लेषणात्मक आलेख है । जीवन के उतार च्ढ्हाव,संघर्षो…
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पढ़कर याद रह जाने वाली किताब- पेपलौ चमार: समीक्षक- राजीव कुमार स्वामी

पढ़कर याद रह जाने वाली किताब- पेपलौ चमार: समीक्षक- राजीव कुमार स्वामी

पुस्तक कोना
एकता प्रकाशन चूरू से प्रकाशित शिक्षक, कवि उम्मेद गोठवाल की राजस्थानी में कविता की पहली ही किताब ’पेपलौ चमार’ दलित जीवन के यातनापूर्ण इतिहास और वर्तमान का दस्तावेज़ी बयान है। दलित विमर्श हिंदी में अब एक स्थापित विषय के रूप में जगह पा चुका है, बावज़ूद इसके दलित जीवन-संघर्ष और शोषण चक्र को इस तरह इतिहास, वर्तमान, राजनीति और धर्म के अनेक कोनों से देखने दिखाने वाली कविता की कोई ऐसी किताब शायद अभी तक हिंदी में भी नहीं है। राजस्थानी में प्रकाशित यह किताब न केवल अपने विषय को व्यापकता प्रदान करती है बल्कि दलित और अछूत कहे जाते रहे समाज की मुक्ति के संघर्ष में एक प्रभावी आवाज़ भी जोड़ती है। जाति आधारित शोषण की विद्रूपताओं को उद्घाटित करती पैनी और मार्मिक कविताओं से भरी यह किताब राजस्थानी…
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नवारुण प्रकाशन से प्रकाशित पुस्तकें: संजय जोशी

नवारुण प्रकाशन से प्रकाशित पुस्तकें: संजय जोशी

पुस्तक कोना
[gallery type="slideshow" size="large" ids="253,254,255,256,257,258"] 'ढाई साल में आठ किताबें ' 2015 में जब नवारुण की कल्पना साकार होना शुरू हुई थी तब हमे सबसे ज्यादा भरोसा चित्रकार लेखक और सीनियर साथी अशोक दा उर्फ़ अशोक भौमिक ने दिलाया था . साइज़ क्या रहेगा ,कागज़ कैसा लगाना है कीमत कितनी रखनी है लेखकों का मान कैसे रखना है यह सब अशोक दा ने बारीकी से समझाया. कई गलतियाँ हुई लेकिन एक -एक करके किताबें आती गयीं और 1000 प्रतियों के संस्करण भी जल्दी -जल्दी ख़त्म होने शुरू हुए . आज यह बताते हुए ख़ुशी हो रही है कि नवारुण में इस समय संस्मरण, सिनेमा , विज्ञान, कविता, दलित अध्ययन, दस्तावेज़, आत्मकथा, चित्रकला जैसी विविध विधाओं की कम से कम 20 पांडुलिपियों पर काम हो रहा है. इस साल के अंत तक…
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