दूर नहीं

दूर नहीं

लघुकथा
    मालिनी शाम के भोजन की तैयारी करके बाल्कनी में बैठकर बाजू के पैड पर बने घौंसले में से उड़ाउड़ कर रहे पक्षी के बच्चे देख मुस्कुरा उठी।फिर सोचने लगी,ये तो प्रकृति का नियम है बड़े होते ही बच्चे उड़कर अपना नया जहॉं बसा लेते है।लेकिन, उसका घौसला तो छोटा है इसलिए ....यहाँ तो इतना बड़ा घर है ,बेटा पढाई के बाद अमरीका में ही सेट हो गया और बेटी ससुराल में है। डोरबेल की आवाज़ आयी और जल्दी से दरवाज़ा खोलते ही सामने उसके पति सोमन को एक हाथ मे बैग और मिठाई लिए मुस्कुराता हुआ खड़ा देख फिर पुलकित हो गयी। "देखो,मेरा रिपोर्ट क्लियर है तो ये पिस्ता डायमंड केक आज जमकर खानेवाला हुँ,तुम्हारी ये आयुर्वेदिक दवाइयाँ भी लाया हुँ" थोड़ी देर दोनों बातें करते बैठे रहे,…
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ये धूप बहुत अच्छा है

ये धूप बहुत अच्छा है

लघुकथा
ये धूप बहुत अच्छा है =============   मैं बस स्टेंड के पास खड़ा था बस के इंतज़ार में . दस बजे ही सूरज जैसे आग बरसा रहा था . बस स्टेंड की शेड से कोई फायदा न था . तभी मैंने घुंघरुओं की आवाज सुनी. मेरा ध्यान उधर गया तो देखा कि दो लोग एक ठेली को धक्का लगाते हुए आ रहे हैं जिस पर गन्ने लादे हुए हैं और रस निकालने के लिए मशीन . एक आदमी बार-बार मशीन के पहिये को चला देता था जिस से घुंघरुओं की आवाज आ रही थी . मेरे चेहरे पर सकून सा दौड़ गया उन्हें देखकर .   "भैया ! जरा गन्ने का रस पिलाओ . पुदीना और नींबू डालकर ."   "बाबू जी ! अदरक भी लगा दूं क्या ? "…
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गर्व है तुम पर

गर्व है तुम पर

लघुकथा
गर्व है तुम पर ========= "क्या लिखा है पापा ने जो इतना ग़मगीन हो गई हो ? " पति ने पत्र पढ़ती पत्नी से पूछा . "कुछ ख़ास नहीं है . घर की ही बात हैं ." वह बोली. "घर की ऐसी क्या बात है जो मुझसे भी नहीं बताई जा सकती ! क्या मैं अभी भी तुम्हारे घर का सदस्य नहीं हूँ ?" पति बोला . "कैसी बात करते हैं आप . इसे पढ़कर आप से ही बात करने के लिए कहा है पापा ने ." "क्या बात करने के लिए कहा है ? बताओ तो सही ." "पापा भैया को लेकर बहुत परेशान हैं और अब घर का बंटवारा करना पड़ेगा . पापा ने मेरा भी हिस्सा रखा था शुरू से लेकिन बड़े भैया की मौत की वजह…
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लघुकथा- पैर भारी हैं निराशा पैदा हुई है

लघुकथा- पैर भारी हैं निराशा पैदा हुई है

लघुकथा
पैर भारी हैं निराशा पैदा हुई है ==================== बुजुर्ग दादा ने अपने बेटे से अपनी अंतिम इच्छा व्यक्त करते हुए कहा - "बेटा ! मैं अपने पोते को देखना चाहता हूँ ." "पिताजी ! वह तो अपने दोस्तों के साथ नौकरी ज्वाइन करवाने की माँग लिए धरने पर बैठा है. वह यहाँ आया तो नौकरी ज्वाइन कैसे करेगा ?" "हाँ , सही कहते हो तुम परीक्षा पास किये तो दो साल हो गये . मुझे भी कोमा से बाहर आए तीन महीने हो गये. आखिर कब उसे नौकरी पर देख सकूँगा?" "हा हा हा ....पिताजी ! कैसी बातें कर रहे हैं आप . सब के अच्छे दिन आ गये हैं . जिस दिन ये बच्चे कोई दो चार गाड़ियों में आग लगायेंगे , दस बीस लडके अपताल में जायेंगे, दस…
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