जनकृति (बहुभाषी अंतरराष्ट्रीय मासिक पत्रिका) का नवीन अंक प्रकाशित

जनकृति (बहुभाषी अंतरराष्ट्रीय मासिक पत्रिका) का नवीन अंक प्रकाशित

पत्रिकाएँ
आप सभी मित्रों को हर्ष के साथ सूचित किया जाता है कि जनकृति (बहुभाषी अंतरराष्ट्रीय मासिक पत्रिका) का नवीन अंक प्रकाशित कर दिया गया है. यह अंक आप नीचे दिए लिंक पर जाकर प्राप्त कर सकते हैं- [https://drive.google.com/…/1JExTtHt_UAYwGw1DzJlf86dyjBqlSP…/] इस अंक में आप विविध क्षेत्रों के नवीन विषयों को पढ़ सकेंगे. पत्रिका में साहित्यिक रचनाओं के साथ साहित्य, कला, मीडिया, शिक्षा, इतिहास, राजनीति इत्यादि से जुड़े विषयों के साथ-साथ समसमायिक विषयों पर भी लेख एवं शोध आलेख पढ़ सकते हैं. कृपया अंक की सूचना को अपने मित्रों तक भी पहुंचाएं ताकि अधिकाधिक लेखकों को मंच का लाभ मिल सके. इसके अतिरिक्त यदि आप पत्रिका में लिखना चाहते हैं तो हमें यूनिकोड फॉण्ट में jankritipatrika@gmail.com पर मेल करें. आप यदि शोध आलेख संबंधी नियम एवं अन्य कोई भी जानकारी चाहते हैं तो www.jankritipatrika.inपर…
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लोकचेतना वार्ता पत्रिका का त्रिलोचन जन्मशती विशेषांक

लोकचेतना वार्ता पत्रिका का त्रिलोचन जन्मशती विशेषांक

पत्रिकाएँ
इस अंक में पढ़ेंगे : अशोक वाजपेयी, Ajay Tiwari, अवधेश प्रधान, Apoorvanand, अब्दुल बिस्मिल्लाह, अष्टभुजा शुक्ल, Bhagwan Singh, Vijay Bahadur Singh, विश्वनाथ त्रिपाठी, मधुरेश, Rdhavallabh Tripathi, रमेशचंद्र शाह, श्रीराम त्रिपाठी, Divik Ramesh, राजेश जोशी, Ramji Rai, रामकुमार कृषक, ध्रुव शुक्ल, ज्ञानेंद्रपति, अरुण कमल, Shailendra Chauhan, Sevaram Tripathi, Amitabh Ray, मिथिलेश, किरण तिवारी, Urvashi, रणजीत कुमार सिन्हा, Ajit Priyadarshi, Venkatesh Kumar, Ravi Ranjan. पाठकों-लेखकों के पास अंक भेजने की प्रक्रिया शुरू हो रही है। पत्रिका यहाँ भी उपलब्ध रहेगी- दिल्ली के प्रमुख बुक स्टॉल, कोलकाता में आनन्द प्रकाशन, मुम्बई में परिदृश्य प्रकाशन, लखनऊ में जनचेतना, इलाहाबाद सूचना साभार: रवि रंजन 
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न्यू मीडिया में हिंदी साहित्य की उभरती प्रवृत्तियाँ: -शैलेश

न्यू मीडिया में हिंदी साहित्य की उभरती प्रवृत्तियाँ: -शैलेश

पत्रिकाएँ
विषय परिचय आज की पीढ़ी सूचना-विस्फोट के युग में जी रही है. और आज का हिंदी साहित्यकार यदि स्वयं को इस सूचना क्रांति से अलग रखता है तो वह स्वयं अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारता है. जो साहित्यकार – लेखक, कवि, कहानीकार, नाटककार आदि इस सूचना तकनीक का लाभ उठाते हुए इसके माध्यम से अपने द्वारा रचित साहित्य को अभिव्यक्त कर रहे हैं वे निश्चित रूप से ऐसा न करने वालों के तुलना में अधिक पाठकों तक पहुँच रहे हैं. इस सूचना क्रांति का प्रयोग व्यक्तिगत और संस्थागत, दोनों ही स्तरों पर, एक हथियार के तौर पर किया जा रहा है जो कि इस जीवन-समर के लिए लगभग अनिवार्य हो चला है. सूचना विस्फोट के साथ ही वर्तमान युग सूचना-आक्रमण, सूचना-आघात और सूचना-प्रतिघात का भी है. अब मात्र सूचना जैसे…
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लघुपत्रिकाएं पिछलग्गू विमर्श का मंच नहीं हैं: चंद्रमौलि चंद्रकांत

लघुपत्रिकाएं पिछलग्गू विमर्श का मंच नहीं हैं: चंद्रमौलि चंद्रकांत

पत्रिकाएँ
आज के समय में मुख्यधारा की पत्रिकाएं व अखबार कारपोरेट जगत व सम्राज्यवादी ताकतों के प्रभाव में समाहित हो रही है। इस वजह से देश के चौथे स्तंभ के प्रति पाठकों में संशय उत्पन्न होता जा रहा है। ऐसी स्थिति में लघु पत्रिकाओं की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। आप जितना बेहतर और वैज्ञानिक ढ़ंग से प्रिंट टैक्नोलॉजी के इतिहास से वाकिफ होंगे उतने ही बेहतर ढ़ंग से लघुपत्रिका प्रकाशन को समझ सकते हैं। लघुपत्रिका का सबसे बड़ा गुण है कि इसने संपादक और लेखक की अस्मिता को सुरक्षित रखा है।  लघुपत्रिकाएं पिछलग्गू विमर्श का मंच नहीं हैं। लघु पत्रिका का चरित्र सत्ता के चरित्र से भिन्न होता है, ये पत्रिकाएं मौलिक सृजन का मंच हैं। साम्प्रदायिकता का सवाल हो या धर्मनिरपेक्षता का प्रश्न हो अथवा ग्लोबलाईजेशन का प्रश्न हो…
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सिंगापुर से पहली हिंदी पत्रिका ‘सिंगापुर संगम’ का पहला अंक प्रकाशित

सिंगापुर से पहली हिंदी पत्रिका ‘सिंगापुर संगम’ का पहला अंक प्रकाशित

पत्रिकाएँ
जनवरी-मार्च 2018 पहला अंक प्रकाशित- http://online.anyflip.com/qggi/oyou/mobile/index.html आप सभी को यह बताते हुए अपार हर्ष हो रहा है कि सिंगापुर से पहली हिंदी पत्रिका 'सिंगापुर संगम' का पहला अंक आपके समक्ष प्रस्तुत है| इस त्रैमासिक पत्रिका को एक पारिवारिक पत्रिका के रूप में पेश करने की कोशिश है| यहाँ रहने वाले कवि, लेखक, रचनाकार अपनी रचनाओं से दुनिया को रू-ब-रू करवाते रहें, साथ ही आने वाली पीढ़ी इस पत्रिका में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले तो हिंदी को संजोए रखने की पहल को एक नई दिशा मिलेगी| सिंगापुर में हिंदी बोलने व समझाने वालों का इतिहास लंबा रहा है| यहाँ का 'लिटिल इंडिया' शायद छोटा भारत ही है| इस छोटे भारत को विश्व ग्राम तक पहुँचाने की छोटी सी कोशिश है| यह पत्रिका सिंगापुर और विश्व के सभी हिंदी प्रेमियों का संगम चाहती…
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‘गगनांचल’ पत्रिका का नवीन अंक ‘स्वतंत्रता के ७० वर्ष’ विशेषांक प्रकाशित

‘गगनांचल’ पत्रिका का नवीन अंक ‘स्वतंत्रता के ७० वर्ष’ विशेषांक प्रकाशित

पत्रिकाएँ
‘गगनांचल’ का नया अंक आ गया है । यह विशेषांक है ‘स्वतंत्रता के ७० वर्ष’ जिसमें स्वतंत्रता प्राप्ति के विगत सात दशकों मे भारत ने विभिन्न क्षेत्रों में क्या प्रगति की..कहाँ कहाँ हम रुके ,कहाँ कहाँ बढ़े का सिंहावलोकन अपने अपने क्षेत्र के पारखी रचनाकारों के द्वारा उनके सर्वेक्षणों के माध्यम से किया गया। सूचना साभार- डॉ. हरीश नवल [संपादक],
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न्यूज़ीलैंड की हिंदी पत्रकारिता- रोहित कुमार ‘हैप्पी’

न्यूज़ीलैंड की हिंदी पत्रकारिता- रोहित कुमार ‘हैप्पी’

पत्रिकाएँ
  न्यूज़ीलैंड की लगभग 46 लाख की जनसंख्या में फीजी भारतीयों सहित भारतीयों की कुल संख्या डेढ लाख से अधिक है। 2013 की जनगणना के अनुसार हिंदी न्यूज़ीलैंड में सर्वाधिक बोले जाने वाली भाषाओं में चौथे नम्बर पर है। यूँ तो न्यूजीलैंड में अनेक पत्र-पत्रिकाएँ समय-समय पर प्रकाशित होती रही हैं सबसे पहला प्रकाशित पत्र था 'आर्योदय' जिसके संपादक थे श्री जे के नातली, उप संपादक थे श्री पी वी पटेल व प्रकाशक थे श्री रणछोड़ क़े पटेल। भारतीयों का यह पहला पत्र 1921 में प्रकाशित हुआ था परन्तु यह जल्दी ही बंद हो गया। एक बार फिर 1935 में 'उदय' नामक पत्रिका श्री प्रभु पटेल के संपादन में आरम्भ हुई जिसका सह-संपादन किया था कुशल मधु ने। पहले पत्र की भांति इस पत्रिका को भी भारतीय समाज का अधिक…
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