Uncategorized
बड़ी चाह थी बड़ी चाह थी कोई होता सुन लेता जो हाले दिल कभी कभी ही सही मगर दर्द से राहत जाती मिल ढूंढ सके ना कोई अपना रात में ना ही उजालों में टूट टूट के बिखर के रह गए सिमट के रह गए छालों में अब ना मुझको पा सकेगी मेरी बेवफा परछाई लौटा कर वापस देती हूं सौगात जो जग से पाई
Read More
Uncategorized
इतना करो उपकार प्रभु 🙏 काश शब्द रोटी बन जाते और स्याही दूध की धार प्रभु , मेरी कविताएं बन जाती किसी जीवन का आधार प्रभु ..... कलम से झरते ईंट और पत्थर किसी सिर पर तो छत हो जाती , नन्हीं कलियां घायल ममता चैन की नींद तो सो पाती , भावनाओं को सिल सिल कर कर दो आंचल के तार प्रभु .... छंदों गीतों की धाराओं में शोक संताप जो बह जाते , जीवन से भागे जीवन कुछ जीवन का सुख पा जाते, बस इतना सा उपकार करो कब मांगा ये संसार प्रभु ..... सपना सक्सेना ग्रेटर नोएडा
Read More
Uncategorized
इतना करो उपकार प्रभु 🙏 काश शब्द रोटी बन जाते और स्याही दूध की धार प्रभु , मेरी कविताएं बन जाती किसी जीवन का आधार प्रभु ..... कलम से झरते ईंट और पत्थर किसी सिर पर तो छत हो जाती , नन्हीं कलियां घायल ममता चैन की नींद तो सो पाती , भावनाओं को सिल सिल कर कर दो आंचल के तार प्रभु .... छंदों गीतों की धाराओं में शोक संताप जो बह जाते , जीवन से भागे जीवन कुछ जीवन का सुख पा जाते, बस इतना सा उपकार करो कब मांगा ये संसार प्रभु ..... सपना सक्सेना ग्रेटर नोएडा
Read More
Uncategorized
क्या बोलूं कैसे सुनाऊं कथा मैं अपने भारत देश महान की , लगा रही है लंका खादी गौरव की सम्मान की । गिरा तरीका बोलचाल का भूले सारे शिष्टाचार , जनता भौंचक समझ न पाए माननीयों का यह व्यवहार । क्या मंत्री क्या संतरी बंधु पद की गरिमा भूल गए , सभ्यता नाम की चीज नही बातों बातों में कबूल गए ,। किसी को बोलें चोर हठेला कभी किसी को चौकीदार कोई पप्पू तो कोई पागल रोज तमाशा रोज बाजार खुद को देश का सेवक कहते दुनिया को रूप दिखा रहे ना बढ़ते ना बढ़ने देते एक दूजे को गिरा रहे आदी हो गए दीवाने हैं खुदगर्जी की दलदल के बेशर्मी से फूल रहे हैं ना इस दल ना उस दल के त्रस्त हो गई जनता भाई दम है तो…
Read More
Uncategorized
क्या बोलूं कैसे सुनाऊं कथा मैं अपने भारत देश महान की , लगा रही है लंका खादी गौरव की सम्मान की । गिरा तरीका बोलचाल का भूले सारे शिष्टाचार , जनता भौंचक समझ न पाए माननीयों का यह व्यवहार । क्या मंत्री क्या संतरी बंधु पद की गरिमा भूल गए , सभ्यता नाम की चीज नही बातों बातों में कबूल गए ,। किसी को बोलें चोर हठेला कभी किसी को चौकीदार कोई पप्पू तो कोई पागल रोज तमाशा रोज बाजार खुद को देश का सेवक कहते दुनिया को रूप दिखा रहे ना बढ़ते ना बढ़ने देते एक दूजे को गिरा रहे आदी हो गए दीवाने हैं खुदगर्जी की दलदल के बेशर्मी से फूल रहे हैं ना इस दल ना उस दल के त्रस्त हो गई जनता भाई दम है तो…
Read More
Uncategorized
आशा जीवन के इस महाकुंभ में आशाओं का साथ ना छूटे , मन का दर्पण उजला रखना मुसकानों की परी ना रूठे .... दुख की काली बदली से मत घबराना रातों में , कितनी भी हो कठिन डगर रहे आस का दामन हाथों में ... बाल उमंग से स्वागत करना नित नई नवेली भोर का , पंख पसारे पंछी बनकर पीछा करो नभ छोर का ..... चलते रहना ही जीवन है विजयी को आराम नहीं , मानव रूप है सबसे पावन रुकना इसका काम नहीं । सपना सक्सेना ग्रेटर नोएडा
Read More
Uncategorized
आशा जीवन के इस महाकुंभ में आशाओं का साथ ना छूटे , मन का दर्पण उजला रखना मुसकानों की परी ना रूठे .... दुख की काली बदली से मत घबराना रातों में , कितनी भी हो कठिन डगर रहे आस का दामन हाथों में ... बाल उमंग से स्वागत करना नित नई नवेली भोर का , पंख पसारे पंछी बनकर पीछा करो नभ छोर का ..... चलते रहना ही जीवन है विजयी को आराम नहीं , मानव रूप है सबसे पावन रुकना इसका काम नहीं । सपना सक्सेना ग्रेटर नोएडा
Read More
Uncategorized
कलम इतिहास गढ़ता हूं तकदीर रचता हूं बेमिसाल ईजाद हूं बस छोटा दिखता हूं जिधर चल दूं जमाना चलता है अपनी आहट से धड़कन लिखता हूं ना आंखे हैं न जुबान फिर भी हर शय पर गिरफ्त रखता हूं तुम ही रखो शौक हथियार का कलम हूं ! तेज धार रखता हूं जिद पर आ जाऊं तो कदमों में ले आऊं प्यार से खरीदो कौड़ी में बिकता हूं । सपना सक्सेना स्वरचित
Read More
Uncategorized
कलम इतिहास गढ़ता हूं तकदीर रचता हूं बेमिसाल ईजाद हूं बस छोटा दिखता हूं जिधर चल दूं जमाना चलता है अपनी आहट से धड़कन लिखता हूं ना आंखे हैं न जुबान फिर भी हर शय पर गिरफ्त रखता हूं तुम ही रखो शौक हथियार का कलम हूं ! तेज धार रखता हूं जिद पर आ जाऊं तो कदमों में ले आऊं प्यार से खरीदो कौड़ी में बिकता हूं । सपना सक्सेना स्वरचित
Read More

गीत

Uncategorized
राम बनो मात पिता के वचन निभाओ निज शीश झुका वनवास चुनो , दहन चले हो करने रावण उससे पहले तुम राम बनो.... राजमहल के सुख बिसराओ नव चेतन का निर्माण करो , पंथ निहारे कोई दुर्बल इन पाषाणों में प्राण भरो, मूक-बधिर मत बनकर बैठो उठ पापी से संग्राम बुनो ..... सबका हो सम्मान बराबर किसी शील पर प्रहार न हो , कैसी भी हो विकट घड़ी ये लक्ष्मण रेखा पार ना हो , असुर न पलने पाये भीतर सत्संग बाण अविराम गुनो .... सपना सक्सेना ग्रेटर नोएडा
Read More
Uncategorized
वाह री वर्दी अंधी गूंगी बहरी वर्दी , सोई ठहरी ठहरी वर्दी । निर्धन का तो महाकाल है , धनवानों की चेरी वर्दी । कानूनों को जेब में रखती हत्यारों की प्रहरी वर्दी । रौब और खनक की कायल , ना तेरी ना मेरी वर्दी । उम्मीदों के दीए बुझा दो , काली घोर अंधेरी वर्दी । मानवता की नमी नदारद , लपट भरी दोपहरी वर्दी । कैसे साया बने किसी का , आखिर वर्दी ठहरी वर्दी । ****************( सपना सक्सेना स्वरचित
Read More
Uncategorized
वाह री वर्दी अंधी गूंगी बहरी वर्दी , सोई ठहरी ठहरी वर्दी । निर्धन का तो महाकाल है , धनवानों की चेरी वर्दी । कानूनों को जेब में रखती हत्यारों की प्रहरी वर्दी । रौब और खनक की कायल , ना तेरी ना मेरी वर्दी । उम्मीदों के दीए बुझा दो , काली घोर अंधेरी वर्दी । मानवता की नमी नदारद , लपट भरी दोपहरी वर्दी । कैसे साया बने किसी का , आखिर वर्दी ठहरी वर्दी । ****************( सपना सक्सेना स्वरचित
Read More