शांत

शांत

कविता
 १ -अगर  तुम्हे बहुत दुःख हो तब         जाओ यहाँ से दूर         बसंत में शहर छोड़ गाँव  की         तरफ निकल जाओ        वहां सरसो  के  पीले  भरे  खेतों  में        जाकर बीचो -बीच खड़े हो        और पुरवैया की हल्के -२        झोंकों  को  महसूस  करो        एक पल शरीर को ढीला छोड़ दो        एक  लम्बी सांस लो        एक बार उन फूलों से        अपने दुःख बयां करो        और फिर तेज़ से        अपने प्रिय को बुलाओ        तुम्हे एक अलग शांति महसूस होगी , २ - अगर नहीं हुई  तो  फिर       अपने आँखों को  ढीला छोड़ दो   …
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” बिटिया ”

” बिटिया ”

कविता
                             '' बिटिया ''                                  मैं  जन्मी माँ के आँगन में खुशियों का पैगाम लिए सुन्दर नन्हें हाथों में थामे बाबू जी के अरमान लिए मैं जन्मी माँ के आँगन में।।१।।             जन्म हुआ मेरा मैं  खुश थी  मन में इक  विश्वास लिए प्यार मिलेगा माँ - बाबू का बड़े भाई का स्नेह लिए मैं  जन्मी  माँ के आँगन में।। २।।            बचपन  में माँ का प्रेम मिला  बाबू जी खातिर तरस गई लेकिन भैया का प्रेम मिला तो अखियाँ जैसे बरस गई मैं  जन्मी माँ के आँगन में।।३।।           नन्हें…
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