” नई पहचान “

” नई पहचान “

कविता
  नित्य सवेरे तुम जग जाना , धरती माँ को शीश नवाना । प्यारे बच्चों इस दुनियाँ में , मिल-जुलकर पहचान बनाना ।।1।। मात-पिता की सेवा करना , बाधाओं से कभी न डरना । पढ़-लिखकर जीवन में अपनें , मिल-जुलकर पहचान बनाना ।।2।। सच्चाई के पथ पर चलना , भेद-भाव की बात न करना । अपनी मंजिल तक जाकर तुम, मिल-जुलकर पहचान बनाना ।।3।। प्रमोद सोनवानी पुष्प      
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पर्यावरण बचाना है- प्रमोद सोनवानी पुष्प

पर्यावरण बचाना है- प्रमोद सोनवानी पुष्प

कविता
    धरा को स्वर्ग बनाना है , पर्यावरण बचाना है । गाँव-गाँव हर गली-गली में , हमको वृक्ष लगाना है ।।1।। पेड़-पौधे देते हैं जग को , शीतल छाया और दवा । इसीलिये मिल-जुलकर हमको , करना है वृक्षों की सेवा ।।2।। परम हितैषी पेड़ सभी , अब न काटें इसे कभी । मिल-जुलकर इन वृक्षों की , देखभाल करेंगे हम सभी ।।3।। वृक्षारोपड़ करना है , जीवन सुखद बनाना है । प्यारे बच्चों इस दुनियाँ में , पर्यावरण बचाना है ।।4।। प्रमोद सोनवानी पुष्प श्री फूलेंद्र साहित्य निकेतन तमनार/पड़िगाँव-रायगढ़ (छ.ग.) 496107
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” उड़न खटोला “

” उड़न खटोला “

कविता
जा रहा था पढ़नें शाला । कंधे पर लटकाकर झोला ।। ठिठक गया था अजी देखकर । नील गगन में उड़न खटोला ।। रंग-विरंगे रंगों से जी । सजा हुआ था उड़न खटोला ।। तेज गति से सर-सर, सर-सर । उड़ रहा था उड़न खटोला ।। सचमुच देखा था मैं उस दिन । सपनें में एक उड़न खटोला ।। प्रमोद सोनवानी "पुष्प" तमनार/पड़िगाँव-रायगढ़ ( छ . ग . ) 496107
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” ऋतुराज का मौसम “

” ऋतुराज का मौसम “

कविता
ऋतु राज का आया मौसम ।। उड़-उड़कर तितली रानी , झूम रही डाली - डाली । बन गई है धरती दुल्हन , अमराई में चलो चलें हम ।।1।। खूब सजे हैं वन-उपवन , महक रहे हैं फूलों के गंध । कोयल रानी कू-कू करके , मिटा रही है सबका गम ।।2।। लदे बौर से बगिया सारी , इसीलिए है लगती प्यारी । इतरायी बुल-बुल रानी , नाच रही वह छम-छमा-छम ।।3।। डॉ.प्रमोद सोनवानी "पुष्प" "श्री फूलेंद्र साहित्य निकेतन" तमनार/पड़िगाँव-रायगढ़ (छ.ग.)भारत, 496107
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” सुना रही है हमें कहानी “

” सुना रही है हमें कहानी “

कविता
फुदक-फुदक कर गीत सुनाती , कोयल जब बगिया में आती । हरी-भरी बगिया को वह तो , अपनें गीतों से महकाती ।।1।। श्यामा-बुलबुल, तितली-भौंरे , नित दिन बगिया में आ जाते । कोयल के संग बड़े मजे से , मिल-जुल अपना रंग जमाते ।।2।। और झिंगुर की सुन शहनाई , नाच रही है मैना रानी । प्रेम-भाव से रहना सीखो , सुना रही है हमें कहानी ।।3।। ✍डॉ.प्रमोद सोनवानी पुष्प श्री फूलेंद्र साहित्य निकेतन तमनार/पड़िगाँव-रायगढ़(छ.ग.)
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