हम  क्यों  और कैसे  मनाये  नया साल ?,

जबकी देश में है हमारी बेटियों का बुरा हाल .

कहने को तो नारा दिया ”बेटी बचाओ ,बेटी पढाओ ”,

मगर बचेंगी तभी तो पढ़ेंगी यह  नौनिहाल .

कदम-कदम पर जो  वेह्शी -दरिंदों का राज है,

कैसे करोगे इनके जीवन को सुरक्षित और बहाल ?

जब तक बेखौफ ,बेफिक्र ,स्वछन्द नहीं होंगी  नन्ही चिड़िया ,

कैसे उड़ सकेगी पंख फैलाकर ,भले ही देदो गगन विशाल ?

व्याघ्रों से ही नहीं इन्हें  घर के दुश्मनों से भी बचाना होगा ,

कोख में ही कभी मार दी जाती है समझ के जी का जंजाल .

तो जनाब ! पहले दो बेटियों को सुरक्षित /स्वतंत्र स्थान समाज में,

तत्पश्चात सार्थक होगा हर्षौल्लास से मनाना  नया साल .

 

 

 

 

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