इतना करो उपकार प्रभु 🙏

काश शब्द रोटी बन जाते
और स्याही दूध की धार प्रभु ,
मेरी कविताएं बन जाती
किसी जीवन का आधार प्रभु …..

कलम से झरते ईंट और पत्थर
किसी सिर पर तो छत हो जाती ,
नन्हीं कलियां घायल ममता
चैन की नींद तो सो पाती ,
भावनाओं को सिल सिल कर
कर दो आंचल के तार प्रभु ….

छंदों गीतों की धाराओं में
शोक संताप जो बह जाते ,
जीवन से भागे जीवन कुछ
जीवन का सुख पा जाते,
बस इतना सा उपकार करो
कब मांगा ये संसार प्रभु …..


सपना सक्सेना
ग्रेटर नोएडा

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