क्या बोलूं

कैसे सुनाऊं कथा मैं अपने
भारत देश महान की ,
लगा रही है लंका खादी
गौरव की सम्मान की ।

गिरा तरीका बोलचाल का
भूले सारे शिष्टाचार ,
जनता भौंचक समझ न पाए
माननीयों का यह व्यवहार ।

क्या मंत्री क्या संतरी बंधु
पद की गरिमा भूल गए ,
सभ्यता नाम की चीज नही
बातों बातों में कबूल गए ,।

किसी को बोलें चोर हठेला
कभी किसी को चौकीदार
कोई पप्पू तो कोई पागल
रोज तमाशा रोज बाजार

खुद को देश का सेवक कहते
दुनिया को रूप दिखा रहे
ना बढ़ते ना बढ़ने देते
एक दूजे को गिरा रहे

आदी हो गए दीवाने हैं
खुदगर्जी की दलदल के
बेशर्मी से फूल रहे हैं
ना इस दल ना उस दल के

त्रस्त हो गई जनता भाई
दम है तो कुछ काम करो ,
ना धन ना बल की कमी है
कुछ नहीं तो इंसान बनो ।

देश के हित में लगने दो
देश की गाढ़ी कमाई को ,
अमन चैन से रहने दो
मत लड़ाओ भाई भाई को ।

सपना सक्सेना
ग्रेटर नोएडा

Leave a Reply

WordPress spam blocked by CleanTalk.