कलम

इतिहास गढ़ता हूं
तकदीर रचता हूं
बेमिसाल ईजाद हूं
बस छोटा दिखता हूं

जिधर चल दूं
जमाना चलता है
अपनी आहट से
धड़कन लिखता हूं

ना आंखे हैं
न जुबान फिर भी
हर शय पर
गिरफ्त रखता हूं

तुम ही रखो
शौक हथियार का
कलम हूं !
तेज धार रखता हूं

जिद पर आ जाऊं
तो कदमों में ले आऊं
प्यार से खरीदो
कौड़ी में बिकता हूं ।

सपना सक्सेना
स्वरचित

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