हादसों का शहर है  यह ,

लाशों से भरा  है  यह .

जिंदगी नहीं है  यहाँ  ,

मौत का डेरा  है  यह .

घर से निकलने वालो ! ,

ख्याल कर लो तुम यह .

हिफाज़त का  अपनी ,

इत्मिनान कर लो यह .

लौट के आओगे वापिस ,

या नहीं !सोच लो  यह .

हादसे होते रहे हैं सदा ,

और सदा होते रहंगे यह .

लोग मरते रहें है अब तक ,

आगे भी मरते रहेंगे यह.

सियासत क्या कर लेगी ?

बस बेचारगी दिखाएगी यह .

रोक नहीं सकती हादसों को ,

लेकिन हादसों पर रोएगी यह .

कहकर कुछ सांत्वना के बोल ,

चंद रुपये झोली में फेंकेगी यह .

तुम चाहे इसे व्यापार समझो ,

अपने फ़र्ज़ को अंजाम देगी यह .

यह हादसों का शहर है  जनाब !

अपनी जिंदगी को खुद संभालो !

दौलत से भी अनमोल जो है यह .

 

 

 

 

 

 

 

Leave a Reply

WordPress spam blocked by CleanTalk.