चीनी साहित्य में सबसे पहले नई कविता के बारे में चर्चा 1916 में हु शि ने की,उन्होंने खुल कर नई कविता यानी कि छन्द विहीन कविता के बारे में अपने तर्कों को इस तरह रखा कि कविता में छन्द से, छन्द विहीन होने के कारण और आवश्यकता स्पष्ट होती दिखाई देती है। वे कविता में तर्क को स्थान देते हुए अनजाने में नई कविता की भावभूमि रखते हुए अतीत को मृत कहने का साहस भी रख रखते हैं। –“शब्द नये पुराने तो नहीं होते, लेकिन मृत या जीवित तो होते हैं।
 
यहीं से हम चीनी साहित्य में नई कविता की नींव देखते हैं, जो लगातार नये- नये प्रयोगों के साथ विश्व में अपनी पहचान बनाती रही है। चीनी कविता की विशेषता यह भी है कि अधिकतर कवियों ने अपने विचारों को बेखौफ रखा है, और साम्यवाद पर सीधे प्रहार करने में भी देर नहीं की।
 
सौ बरस सौ कविताएं
चीन की कविताओं में आधुनिकवाद
 
नाम से एक संकलन तैयार किया गया है, जो मिंडी डी के अंग्रेजी संकलन का हिंदी में अनुवाद है। मिंडी डी ने यह संकलन विशेषरूप से हिंदी पाठकों के लिए तैयार किया था, जिसमें सौ वर्ष के प्रमुख कवियों की सौ कविताएं संकलित हैं, ये समस्त कवि चीन में आधुनिक कविता के पोषक रहे हैं। यह संकलन चीनी कविता एक पूरी सदी का प्रतिनिधित्व करते हुए हिन्दी पाठकों के लिए महत्वपूर्ण है।
हिन्दी में इसका द्वारा किया गया है, और सहअनुवादक हैं ‍रति सक्सेना,नीता पोरवाल,रचना श्रीवास्तव,राजलक्ष्मी शर्मा।
 
इस अनुवाद को प्रकाशन से पूर्व ‍‍‍‍चीनी साहित्य के अनुवाद के लिए DJS Translation Award से सम्मानित किया गया है।
 
प्रकाशन कृत्या
पृष्ठ 176
 
आवरण चित्र चंचल जी
मूल्य 350, कुछ समय के लिए छूट उपलब्ध है

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