धरती की बात दूर है तस्वीर हम ना देंगे
कश्मीर हमारा है कश्मीर हम ना देंगे

जुलमो सितम की इंतिहा अब होने लगी है
रंगत सुहाने स्वर्ग की भी खोने लगी है
दुश्मन की शातिराना चालों का असर है
सुर्ख, हिमालय की हिम होने लगी है
नफरत के बीज उगने नही देंगे चमन में
दिलों को जोड़ती सी जंजीर हम ना देंगे
कश्मीर हमारा है……. .

कहीं बम कहीं गोली कहीं पत्थर बरस रहे
अपने ही पहरेदारों के हाथों को कस रहे
नासमझ अपनो को पहचानते नहीं
ये नौजवान कैसे दलदल में धंस रहे
सरहद के पार से बस खंजर ही मिलेगा
वो वहशी कभी रौशन तकदीर नही देंगे
कश्मीर हमारा है ………

सपना सक्सेना
स्वरचित

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