चौपाई
—‘——

मातु देवकी जन्म दिलाई,
बचपन के सुख जसमति पाई ।
गोकुल में आखों के तारे,
गिरवर धारी नंद दुलारे ।।

बाल समय में माटी खाई ,
जसमति माई मारन आई ।
जब तूने मुख् खोल दिखाया,
उसमें था ब्रह्मांड समाया ।।

पूतना मारी कंस को मारा ,
जनम जनम के दुख से तारा ।
आन बसो हिय जानि धामा,
निसदिन जपते राधा नामा ।।

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