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आज की प्रस्तुति

ग़ज़ल

2122 2122 2122 212

ग़ज़ल

रात भर मेरा तडपना और जलवा चांद का
क्या कहें दिल का धडकना और जलवा चांद का

वो नही आये मगर कोई कसक होती रही
मुस्तकिल यादें बरसना और जलवा चांद का

तुम मेरे हो ये यकीं होने तलक रुकते जरा
तीर सा तेरा निकलना और जलवा चांद का

कट गई थोड़ी बहुत जो साथ तेरे जिन्दगी
याद कर कर के सिसकना और जलवा चांद का

आखिरी पैगाम पहुचे कातिलों के पास में
उम्र भर उनका तरसना और जलवा चांद का…

सपना सक्सेना
ग्रेटर नोएडा

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