काग़ज

बचपन कोरे काग़ज जैसा
सोच समझ कर भरना रंग
एक बार जो चढ़ जाये तो
जीवन भर फिर रहेगा संग
अनुशासन की कलम से लिखना
प्रेम और संयम की भाषा
दृढनिश्चय की स्याही से
सजी हो हर अभिलाषा
परहित और परोपकार संग
लिखना सबको दें सम्मान
विद्या धन से रहे सुशोभित
पायें जग में आदर मान ….

सपना सक्सेना
स्वरचित

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