अस्तित्व…

मैंने जब भी सूना है

की ईश्वर है, मन की आशाओ ने

कुछ और जिया है,

हर एक इंसान में महसूस किया है

किसी अनजान अस्तित्वको,

बातो में निकलती दुवाओ में, कभी

माँ की हथेलियों में, पापा के मश्वरो में,

भाई के राखी बंधे हाथो मे,

बहन की जप्पियो में, भाभी की बातो में

दोस्तों की महफ़िलो में, प्यारभरे उन लम्हो में

किसी की मुस्कानों में,

किसी की आँखों के दर्द में…

कुदरत की बनायी सभी रचनाये

कर रही हे प्रेरित, उस अस्तित्व की

उष्मा को अपने अंदर

सहेजकर एक ओर

नया जीवन जीने की तमन्ना को

जीवित कर लेती हूँँ।
-मनीषा ‘जोबन’

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