शारदे की पूजा करूँ काम नहीं दूजा करूँ
भक्ति ऐसी मेरे हिय में जगाय दीजिए।।

साथ दे जो हर घड़ी कभी न अकेला छोड़े
धर्म पथ पर कोई वो सहाय दीजिए।।

लेखनी का शस्त्र धरूँ अशिक्षा पे वार करूँ।
ज्ञान दीप मेरे हिय में जलाय दीजिए।।

शिक्षा जो ग्रहण किया सभी में मैं बाँट सकूँ
मानव का धर्म हमें बतलाय दीजीए।।
#मालतीमिश्रा

Leave a Reply

WordPress spam blocked by CleanTalk.