एक दूजे को बस गिराने में
लोग मशगूल हैं कमाने में

हसरतें भटकती कहाँ तक हैं
महफिलों में कभी वीराने में

रौनकें, रौनकों के जैसी हैं
यार,केवल शराब खाने में

वक्त जाया नहीं किया जाता
और को बस कि आजमाने में

शौक उसका फसल जलाने में
मेरी दिलचस्पी है उगाने में

जीत जाये तो जीत उसकी है
हाथ मेरा मगर हराने में

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