क्या लिखूं
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बोल मेरे मन क्या लिखूं
विषय श्रंगार का अतिरेक या लोचन के अश्रु दाह लिखूं

अगम चितेरे की तूलिका के रंगो का सत्कार करूं
नमन करूं प्रकृति को या ईश शीश पर हार धरूं
तरणी तरंग की अठखेली या कलुष अवरुद्ध प्रवाह लिखूं

बलिदानों की श्रद्धा सुमन कि जय का गौरव गान रहे
रोता बिलखता बचपन या कि कच्ची सी मुस्कान रहे
पनघट वाली बंसी या फिर विरह वेदना आह ! लिखूं
बोल मेरे मन क्या लिखूं

सपना सक्सेना

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