एक शाम भोजपुरी के नाम !

पूर्वी चंपारण के ऐतिहासिक जिला मुख्यालय मोतिहारी के  टाउन हॉल में एक साथ भोजपुरी भाषा की तीन-तीन महत्वपूर्ण कृतियों का लोकार्पण हुआ। पहली कृति थी उर्दू और हिंदी के प्रख्यात शायर और रंगकर्मी गुलरेज़ शहजाद की किताब ‘ चंपारन सत्याग्रह गाथा’। प्रबंध काव्य शैली में रचित यह किताब दक्षिण अफ्रीका से लौटने के बाद चंपारन की भूमि में गांधी के महात्मा बनने की कहानी है। इस भोजपुरी प्रबंध काव्य में गुलरेज़ शहज़ाद ने गांधी के नेतृत्व में चम्पारण के सफल सत्याग्रह के बहाने चंपारण के इतिहास और संस्कृति तथा अंग्रेज साहबों द्वारा निलहे किसानों के शोषण और उनपर हुए अत्याचारों की जीवंत तस्वीर खींची है। चम्पारण सत्याग्रह की पृष्ठभूमि और निलहे किसानों की व्यथा पर ही लिखी गई दूसरी कृति थी लेखक दिवाकर राय का नाटक ‘नीली आग’। लोकार्पित तीसरी किताब थी भोजपुरी के युवा कवि जलज कुमार अनुपम की भोजपुरी कविताओं का पहला संकलन ‘हमार पहचान’। तीनों कृतियों के प्रकाशक हैं – हर्फ़ मीडिया, बी-84 ग्राउंड फ्लोर, सेवक पार्क, द्वारका मोड़, नई दिल्ली 110059 । इस मौके पर एक भोजपुरी कवि-सम्मेलन का भी आयोजन हुआ जिसमें मेरे अलावा भोजपुरी भाषा के प्रखर कवियों – डॉ जयकांत सिंह जय, डॉ ब्रज भूषण मिश्र, विख्यात लोकगायक और कवि ब्रज किशोर दूबे, गुलरेज़ शहज़ाद, जलज कुमार अनुपम, धनुषधारी कुशवाहा, संजय उपाध्याय, डॉ सबा अख्तर, डॉ मधुबाला सिन्हा और रूहुल हक़ हमदम ने अपनी-अपनी भोजपुरी कविताओं का पाठ किया। लोकार्पण सत्र का बेहतरीन संचालन सतीश चंद्र मिश्रा और कवि-सम्मेलन का काव्यात्मक संचालन डॉ अरुण कुमार ने किया।

समारोह के आयोजक श्रमिक कला उत्थान समिति और सह आयोजक हर्फ़ मीडिया तथा रोशनाई को इस यादगार आयोजन के लिए बहुत बधाई

सूचना साभार- ध्रुव गुप्त

 

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