जा रहा था पढ़नें शाला ।
कंधे पर लटकाकर झोला ।।

ठिठक गया था अजी देखकर ।
नील गगन में उड़न खटोला ।।

रंग-विरंगे रंगों से जी ।
सजा हुआ था उड़न खटोला ।।

तेज गति से सर-सर, सर-सर ।
उड़ रहा था उड़न खटोला ।।

सचमुच देखा था मैं उस दिन ।
सपनें में एक उड़न खटोला ।।

प्रमोद सोनवानी “पुष्प”
तमनार/पड़िगाँव-रायगढ़
( छ . ग . ) 496107

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