लोकचेतना वार्ता पत्रिका का त्रिलोचन जन्मशती विशेषांक

लोकचेतना वार्ता पत्रिका का त्रिलोचन जन्मशती विशेषांक

पत्रिकाएँ
इस अंक में पढ़ेंगे : अशोक वाजपेयी, Ajay Tiwari, अवधेश प्रधान, Apoorvanand, अब्दुल बिस्मिल्लाह, अष्टभुजा शुक्ल, Bhagwan Singh, Vijay Bahadur Singh, विश्वनाथ त्रिपाठी, मधुरेश, Rdhavallabh Tripathi, रमेशचंद्र शाह, श्रीराम त्रिपाठी, Divik Ramesh, राजेश जोशी, Ramji Rai, रामकुमार कृषक, ध्रुव शुक्ल, ज्ञानेंद्रपति, अरुण कमल, Shailendra Chauhan, Sevaram Tripathi, Amitabh Ray, मिथिलेश, किरण तिवारी, Urvashi, रणजीत कुमार सिन्हा, Ajit Priyadarshi, Venkatesh Kumar, Ravi Ranjan. पाठकों-लेखकों के पास अंक भेजने की प्रक्रिया शुरू हो रही है। पत्रिका यहाँ भी उपलब्ध रहेगी- दिल्ली के प्रमुख बुक स्टॉल, कोलकाता में आनन्द प्रकाशन, मुम्बई में परिदृश्य प्रकाशन, लखनऊ में जनचेतना, इलाहाबाद सूचना साभार: रवि रंजन 
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11वां विश्व हिंदी सम्मेलन, मॉरीशस, 18-20 अगस्त 2018, पंजीकरण 15 जुलाई तक

11वां विश्व हिंदी सम्मेलन, मॉरीशस, 18-20 अगस्त 2018, पंजीकरण 15 जुलाई तक

गतिविधियाँ
11वां विश्व हिंदी सम्मेलन विदेश मंत्रालय द्वारा मॉरीशस सरकार के सहयोग से 18-20 अगस्त 2018 तक मॉरीशस में आयोजित किया जा रहा है। 11वें विश्व हिंदी सम्मेलन को मॉरीशस में आयोजित करने का निर्णय सितंबर 2015 में भारत के भोपाल शहर में आयोजित 10वें विश्व हिंदी सम्मेलन में लिया गया था।पहला विश्व हिंदी सम्मेलन 1975 में नागपुर, भारत में आयोजित किया गया था। तब से, विश्व के अलग-अलग भागों में, ऐसे 10 सम्मेलनों का आयोजन किया जा चुका है। 11वें विश्व हिंदी सम्मेलन के लिए विदेश मंत्रालय नोडल मंत्रालय है। व्यवस्थित एवं निर्बाध रूप से सम्मेलन के आयोजन के लिए विभिन्न समितियाँ गठित की गई हैं।सम्मेलन का मुख्य विषय "हिंदी विश्‍व और भारतीय संस्‍कृति" है। सम्मेलन का आयोजन स्थल "स्वामी विवेकानंद अंतर्राष्ट्रीय सभा केंद्र" पाई, मॉरीशस है पंजीकरण- 11वें विश्व हिंदी सम्मेलन में भाग लेने…
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कथाकार भगवानदास मोरवाल से डॉ. एम. फीरोज अहमद की बातचीत

कथाकार भगवानदास मोरवाल से डॉ. एम. फीरोज अहमद की बातचीत

साक्षात्कार
1- आप अपने जन्म स्थान घर परिवार और पारिवारिक पृष्ठभूमि के बारे में विस्तार से बताइए...? - मेरा जन्म हरियाणा के काला पानी कहे जाने वाले मेवात क्षेत्र के छोटे-से क़स्बा नगीना के एक अति पिछड़े मज़दूर और इस धरती के आदि कलाकार कुम्हार जाति के बेहद निम्न परिवार में हुआ। अपने मेरे घर-परिवार और पारिवारिक पृष्ठभूमि के बारे में पूछा है। अभी हाल में मैं अपने क़स्बे में गया हुआ था, तो संयोग से कुम्हार जाति की वंशावली का लेखा-जोखा रखने वाले हमारे जागा अर्थात जग्गा आ पहुँचे। मैंने जब इनसे अपनी पारिवारिक पृष्ठभूमि के बारे में पूछा, तब इन्होंने कुछ ऐसी जानकारी दी जो मेरे लिए लगभग अविश्वसनीय थीं। जैसे इन्होंने बताया की हमारे मोरवाल गोत्र के पूर्वज उत्तर प्रदेश के काशी के मूल निवासी थे। काशी से…
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श्रीमती मैत्रेयी पुष्पा जी से डॉ. वंदना कुमार एवं राजेन्द्र कुमार की बातचीत

श्रीमती मैत्रेयी पुष्पा जी से डॉ. वंदना कुमार एवं राजेन्द्र कुमार की बातचीत

साक्षात्कार
‘‘आवारा लड़की को पता ही नहीं था कि आवारा कैसे हुआ जाता है?”- मैत्रेयी पुष्पा शोध-विषय “समकालीन हिंदी लेखिकाओं की प्रतिनिधि आत्मकथाओं में अन्तर्निहित अनुभूतियाँ” के अन्र्तगत अनुशीलन हेतु चयनित आत्मकथा खण्ड-1 ‘कस्तूरी कुण्डल बसै’ तथा खण्ड-2 ‘गुड़िया भीतर गुड़िया’ की रचनाकार हिंदी साहित्य जगत् में नारी-चेतना की सशक्त वाहिका श्रीमती मैत्रेयी पुष्पा जी से डॉ. वंदना कुमार एवं राजेन्द्र कुमार की पुरखौती मुक्तांगन, नया रायपुर (छ.ग.) में आयोजित रायपुर साहित्य महोत्सव 2014 में हुई बातचीत के प्रमुख अंश   1. डॉ. वंदना कुमार- आपकी आत्मकथा खण्ड-1 ‘कस्तूरी कुण्डल बसै’ तथा खण्ड-2 ‘गुड़िया भीतर गुड़िया’ के शीर्षक चयन (नामकरण) के क्या कारण रहें हैं, किनसे प्रभावित होकर यह शीर्षक चयन आपने किया; इन शीर्षकों का पाठक द्वारा क्या अर्थ निकाला जावे। शीर्षक से आपका क्या अभिप्राय है ? श्रीमती मैत्रेयी…
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डॉ. सुशीला टाकभौरे जी से राजेन्द्र कुमार की बातचीत

डॉ. सुशीला टाकभौरे जी से राजेन्द्र कुमार की बातचीत

साक्षात्कार
नारी कहीं भी, कभी भी कमजोर नहीं - डॉ. सुशीला टाकभौरे डॉ. वंदना कुमार, शोध-निर्देंशक एवं सहायक प्राध्यापक (हिंदी), शासकीय नागार्जुन स्नातकोत्तर विज्ञान महाविद्यालय, रायपुर (छ.ग.) के मार्गदर्शन में राजेन्द्र कुमार, शोधार्थी (हिंदी) पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर (छत्तीसगढ़) द्वारा शोध-विषय “समकालीन हिंदी लेखिकाओं की प्रतिनिधि आत्मकथाओं में अन्तर्निहित अनुभूतियाँ” के अन्र्तगत अनुशीलन हेतु चयनित आत्मकथा ‘शिकंजे का दर्द‘ के रचनाकार समतावादी दलित साहित्यकार के रूप में विख़्यात, नर्मदा-अंचल की बेटी डॉ. सुशीला टाकभौरे जी से बातचीत के प्रमुख अंश 1. राजेन्द्र कुमार- कौसल्या बैसंत्री जी की आत्मकथा तथा आपकी आत्मकथा तीन पीढ़ियों की महिलाओं के जीवन-संघर्ष की कहानी है तथा आप दोनों ने ही तिहरा दंश (गरीबी, जातिवाद, महिला) भोगे हैं। आपकी आत्मकथा, कौसल्या बैसंत्री जी की आत्मकथा से किस प्रकार भिन्न है? डॉ. सुशीला टाकभौरे- कौसल्या बैसंत्री जी…
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शहर मोर्रिस्विल्ल, नॉर्थ कैरोलाइना में कवि-सम्मलेन

शहर मोर्रिस्विल्ल, नॉर्थ कैरोलाइना में कवि-सम्मलेन

गतिविधियाँ
चित्र: संदीप कपूर हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति की ओर से अमेरिका और कैनेडा के 24 महानगरों में कविसम्मेलन आयोजित किए गए। इनसे एकत्रित हुए धन को हिंदी पढ़ाने के कार्यों में प्रयोग किया जाता है। कई शहरों में कार्यक्रम करने के पश्चात् कविगण 19 मई को शहर मोर्रिस्विल्ल पहुँचे। यहाँ के हिन्दू भवन ( हॉल ) में अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति और हिंदी विकास मंडल, नॉर्थ कैरोलाइना की तरफ से कवि-सम्मलेन का आयोजन किया गया था। सर्वेश अस्थाना, सोनरूप विशाल और गौरव शर्मा ने 450 के करीब लोगों का मनोरंजन किया। सर्वेश अस्थाना का 'भगवान् कसम मैं झूठ नहीं बोलता' और गौरव शर्मा की एक लाइन कविता ने लोगों को खूब हँसाया। सोनरूप विशाल की 'माँ' और 'लड़कियाँ' कविताएँ बहुत पसंद की गईं। कार्यक्रम का आरम्भ…
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वरिष्ठ कथाकार सूरज प्रकाश जी से लोकमित्र की बातचीत

वरिष्ठ कथाकार सूरज प्रकाश जी से लोकमित्र की बातचीत

साक्षात्कार
संवाद/साइबर समाज शास्त्र असंतुष्ट समाज की भावनात्मक शरणस्थली है फेसबुक- सूरज प्रकाश सरल, आत्मीय, भावुक, मिलनसार और गर्मजोशी से भरे। यूँ कहिये कि हम जितने अच्छे गुण किसी आदर्श लेखक में तलाशने की फ़िराक में रहते हैं, वरिष्ठ कथाकार सूरज प्रकाश सर में वो सब जरूरत से ज्यादा ही और छलकते हुए हैं। उनसे मिलने पर उनकी सरलता और सहजता हमें बरबस अपनत्व से भरे पुराने लेखकों की याद दिलाती है। वे हैं भी वरिष्ठ लेखक लेकिन उनकी रचना भूमि न केवल नई बल्कि एक तरह से भविष्य की सर जमीं है। जी, हाँ हाल के पिछले ढाई तीन बरसों में उन्होंने ज्यादातर कहानियां साइबर जगत की पृष्ठभूमि पर लिखी हैं, जो न केवल पाठकों के द्वारा हाथों हाथ ली गयी हैं बल्कि हिंदी के तमाम लेखकों ने भी उनसे…
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डॉ. श्‍याम सुंदर दुबे जी से जयप्रकाश मानस जी की बातचीत

डॉ. श्‍याम सुंदर दुबे जी से जयप्रकाश मानस जी की बातचीत

साक्षात्कार
ललित निबंध पठकीय एवं समीक्षकीय तैयारी की माँग करता है - डॉ. श्यामसुंदर दुबे सर्जनात्‍मक एवं आलोचनात्‍मक लेखन के क्षेत्र में कार्यरत लोक-मानस के मर्मज्ञ लेखक डॉ. श्‍याम सुंदर दुबे एक महत्‍वपूर्ण हस्‍ताक्षर के तौर पर मौजूदगी दर्ज कराते हैं। डॉ. श्‍याम सुंदर दुबे का जन्म 12 दिसम्बर, 1944 को हुआ। व हिंदी के प्रमुख ललितकारों में एक हैं । कविता, कथा, उपन्‍यास, नवगीत, समीक्षा, आलोचना इनके अध्‍ययन एवं रचनाकर्म की प्रमुख विधाएँ हैं। डॉ. दुबे के लेखन में लोक-परंपरा अपनी सामाजिक और सांस्‍कृतिक छवियों की अंतरंगता के साथ जुड़ी है। इनके ललित निबंधों और कविताओं में लोक का खिलखिलाती हुई दुनिया दिखती है । सभी प्रमुख विधाओं में अब तक डॉ. दुबे की 30 से अधिक पुस्‍तकें प्रकाशित हैं। आपके सर्जनात्‍मक कार्य पर अनेक शोध कार्य भी संपन्‍न हो चुके…
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हिंदी ग़ज़ल परंपरा में त्रिलोचन: निशान्त मिश्रा

हिंदी ग़ज़ल परंपरा में त्रिलोचन: निशान्त मिश्रा

आलेख
हिंदी ग़ज़ल की जो सरिता ‘अमीर खुसरो’ के यहाँ से उद्भावित होती है, वह कबीर, भारतेन्दु, प्रेमघन, प्रसाद और निराला के यहाँ से प्रवाहित होती हुई ‘त्रिलोचन’ तक आती है । त्रिलोचन इस सरिता के बहाव के लिए एक मुकम्मल जमीन का निर्माण करते हैं और ‘गुलाब एवं बुलबुल’ (1956 ई.) इस प्रयत्न का सर्जनात्मक एवं व्यवस्थापक रूप है । इस संग्रह की गज़लों में वह भावभूमि है जो आगे चलकर दुष्यंत आदि गजलकारों के यहाँ पुष्पवित एवं पल्लवित होती है । एक ओर उनकी गलों में जहाँ उर्दू काव्य परंपरा के तत्व – प्रेम, वेदना, उपेक्षा, निजता, अजनबीयत, ऊब इत्यादि देखने को मिलते हैं वहीं दूसरी ओर सांप्रदायिकता विरोध, स्वार्थनिष्ठा विरोध, पर्यावरण चिंता एवं समसामयिक यथार्थ बोध जैसे तत्व भी उनकी गजलगोई में विद्यमान हैं । त्रिलोचन ने संस्कृत,…
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अरुण कमल का वैचारिक गद्य: डॉ. राकेश कुमार सिंह

अरुण कमल का वैचारिक गद्य: डॉ. राकेश कुमार सिंह

आलेख
अरुण कमल समकालीन हिंदी साहित्‍य-परिदृश्‍य पर कवि-आलोचक के रूप में सशक्‍त और लोकप्रिय पहचान रखने वाले महत्‍वपूर्ण रचनाकार हैं। हालांकि वे अंग्रेजी के प्रोफेसर हैं लेकिन उनका साहित्यिक व्‍यक्तित्‍व हिंदी भाषा में निर्मित हुआ है। यह निर्मिति अकारण नहीं है बल्कि अपनी अभिव्‍यक्तिगत जातीय अस्मिता के बोध का परिणाम है। एक ऐसा रचनात्‍मक संसार जो घर-बाहर की सार्थक बेचैनी का समर्थ उदाहरण है। यह सार्थक बेचैनी जहां उनकी कविता में काव्‍यात्‍मक बोध को सघन, सूक्ष्‍म और अनूठा बनाती है, वहीं उनकी साहित्यिक-दृष्टि को ठोस एवं प्रामाणिक परिप्रेक्ष्‍य प्रदान करती है। इसे हम उनकी दो वैचारिक गद्य की पुस्‍तकों - 'कविता और समय' तथा 'गोलमेज' में देख सकते हैं। कविता और समय - यह उनके आलोचनापरक लेखों का पहला संकलन है। इसमें संकलित लेख विभिन्‍न पत्र-पत्रिकाओं एवं विचार गोष्ठियों की उपज…
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ये धूप बहुत अच्छा है

ये धूप बहुत अच्छा है

लघुकथा
ये धूप बहुत अच्छा है =============   मैं बस स्टेंड के पास खड़ा था बस के इंतज़ार में . दस बजे ही सूरज जैसे आग बरसा रहा था . बस स्टेंड की शेड से कोई फायदा न था . तभी मैंने घुंघरुओं की आवाज सुनी. मेरा ध्यान उधर गया तो देखा कि दो लोग एक ठेली को धक्का लगाते हुए आ रहे हैं जिस पर गन्ने लादे हुए हैं और रस निकालने के लिए मशीन . एक आदमी बार-बार मशीन के पहिये को चला देता था जिस से घुंघरुओं की आवाज आ रही थी . मेरे चेहरे पर सकून सा दौड़ गया उन्हें देखकर .   "भैया ! जरा गन्ने का रस पिलाओ . पुदीना और नींबू डालकर ."   "बाबू जी ! अदरक भी लगा दूं क्या ? "…
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गर्व है तुम पर

गर्व है तुम पर

लघुकथा
गर्व है तुम पर ========= "क्या लिखा है पापा ने जो इतना ग़मगीन हो गई हो ? " पति ने पत्र पढ़ती पत्नी से पूछा . "कुछ ख़ास नहीं है . घर की ही बात हैं ." वह बोली. "घर की ऐसी क्या बात है जो मुझसे भी नहीं बताई जा सकती ! क्या मैं अभी भी तुम्हारे घर का सदस्य नहीं हूँ ?" पति बोला . "कैसी बात करते हैं आप . इसे पढ़कर आप से ही बात करने के लिए कहा है पापा ने ." "क्या बात करने के लिए कहा है ? बताओ तो सही ." "पापा भैया को लेकर बहुत परेशान हैं और अब घर का बंटवारा करना पड़ेगा . पापा ने मेरा भी हिस्सा रखा था शुरू से लेकिन बड़े भैया की मौत की वजह…
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