१ -अगर  तुम्हे बहुत दुःख हो तब 

       जाओ यहाँ से दूर 

       बसंत में शहर छोड़ गाँव  की 

       तरफ निकल जाओ 

      वहां सरसो  के  पीले  भरे  खेतों  में 

      जाकर बीचो -बीच खड़े हो 

      और पुरवैया की हल्के -२ 

      झोंकों  को  महसूस  करो 

      एक पल शरीर को ढीला छोड़ दो 

      एक  लम्बी सांस लो 

      एक बार उन फूलों से 

      अपने दुःख बयां करो 

      और फिर तेज़ से 

      अपने प्रिय को बुलाओ 

      तुम्हे एक अलग शांति महसूस होगी ,

२ – अगर नहीं हुई  तो  फिर 

     अपने आँखों को  ढीला छोड़ दो 

     कुछ ट्रेजिक सीन याद करो 

     फिर आँखों को पूरा भीग जाने दो 

     उसे सुखाओ मत ,

    फिर खेतों की मेढ़ों पर लेट जाओ 

    और नीले  साफ़  आसमान  को देखो 

    कितना शांत प्यारा लग रहा है 

    और  उसका आनंद देखो 

    वह तुमको देखकर हँस रहा है 

    आशीर्वाद दे  रहा है 

    शुभाशीष दे रहा   है ,

                                                                                            –  ऋजु मिश्र 

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