कागज़ के टुकड़ों से प्यार हो गया

छंद ,काव्य सृजन अपार हो गया

संभाल कर रखता हूँ इन्हें सर्वदा

क्योंकि ये ही मेरा संसार हो गया

सुख दुख की बातें लिखता रहा

राष्ट्र जागरण का विचार हो गया

दिल की धकधक हो या नई बात

लिखा श्रृंगार तो   असर हो गया

कवि राजेश पुरोहित

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